Monday, June 2, 2014

A Complete Introduction to Gemstone - "Pearl" (Moti Ratna ka Sampoorna Parichay)

I am going to start an introductory series on Gemstones. The first post in the series is on Pearl. 
(Android users who are watching this post through my app (Astro Junction App) on their smartphones, should click on the title of the post above to see the complete post.)
What is Pearl: Pearl gets produced within shelled mollusc. When a foreign substance (dust or insect etc.) gets penetrated through the skin of mollusc, it creates irritation to it and the mollusc starts secreting a substance (nacre) which start forming a layer on top of the foreign substance. Over the course of many months and years the mollusc keeps on creating layer over layer above the foreign substance and this gets converted into a pearl. 
Pearl come in many shapes and colors. Perfect round shaped pearls are rare and demand high price in the market. They come in many colors like white, pink, silver, cream, blue, black etc. 

Physical Properties of Pearl:  

Mohs Scale: 2.5 - 4.5
Specific Gravity: 2.60 - 2.85
Birefringence: 0.156
Refractive Index: 1.52 - 1.66

Origin: Natural pearls are not produced in large quantities now but still Bahrain and Australia are two countries which still produce natural pearls.

Natural Vs Cultured Vs Imitation Pearls: Natural pearls are naturally produced inside the oyster but in case of cultured pearls the foreign particle around which the oyster starts creating layers, is inserted by a human. Natural pearls are sold at very high prices whereas cultured pearls are not as expensive as natural. From astrology point of view, cultured pearls are also accepted. X-Ray is the medium by which a pearl can be determined to be either a natural or a cultured one.  
Imitation pearls look like a natural or cultured pearl but they are not naturally produced inside the body of an oyster. They are made in a lab. They are very inexpensive but many greedy jewelers sell imitation pearls as natural or cultured pearls. 

How to Identify a Genuine Pearl: As mentioned above, there are three main categories of pearls; Natural, Cultured and Imitation. A X-Ray machine is used to identify if it is a natural or cultured pearl. A microscope is used to study the structure of the pearl to determine if it is natural and cultured pearl or an imitation pearl.
Apart from X-Ray, every stone has certain definitive properties like specific gravity, Moh's hardness, Refractive Index etc. All these parameters can be determined from tools like Refractometer (used to measure birefringence and refractive index), Polariscope etc. and matched with the actual values of pearl to see if it is a genuine pearl or the imitation. 
When you go to a gemstone dealer to buy a gemstone, most of the time they say that the stone is natural and genuine, never believe them and get the stone tested from a reliable source or lab. 
The worrying factor is that now a days some gem labs have nexus with some corrupt jewelers and the labs give genuine certificates for fake stones to the jewelers. And then these jewelers sell fake "certified gems" in high rates to you.  
Gem Refractometer to Measure Refractive Index of a Stone
Polariscope for measuring Optic Character of Gemstones
Treatments on Pearl: Various kinds of treatments are done to a gemstone which may sometimes completely change the structure of a stone. Treatments are done to hide the cracks, to beautify the stone, to hide the impurities and inclusions within the stone. So, the buyers should be careful to identify these treatments. White Pearls are routinely bleached to lighten the dark spots on them. They are also dyed in various colors which hides all the negative aspects of a Pearl and increase its value in buyer's eyes. Astrologically such treated stones are not considered suitable. 
Long Wave and Short Wave ultraviolet light can be used to see the uneven concentration of dye on the pearl and it can be determined if the treatment has been done or not. 

Who Should Wear it: Those who have Cancer, Scorpio or Pisces in their Lagna (First House) can wear Pearl. 

scorpio lagna ascendant vrishchikacancer lagna ascendant karka
pisces lagna ascendant meen

How to Energize: I have already written a post on how to energize the stones. The post can be accessed by clicking on this link

Mantra to Energize Pearl:  

Om Cham Chandraaye Namaha 
Om Shraam Shreem Shraum Sah Chandraaye Namaha 
General Benefits: Pearl is Moon's stone. Moon rules over blood, prosperity, peace of mind, mother, blood pressure, beauty etc. Wearing a pearl gives benefit in all these areas. It helps in alleviating anxiety, stress, and blood related disorders. But be warned, stones should not be worn without the suggestion of an expert astrologer. If the stone is inappropriate as per your horoscope then it may harm you, if worn.

Contradictory Stones as per Vedic Astrology: Diamond, Blue Sapphire, Emerald, Hessonite and Cat's Eye should not be worn along with Pearl.

Substitute Stones: Moon stone.

Do's and Dont's: 1) Pearl gives maximum benefit when worn with Moon Yantra.  

2) Pearl gives complete benefit only when it is worn after energizing. 

3) After wearing Pearl, it should not be removed even for a minute. Pearl absorbs the rays of the sun and keeps on conserving the energy from the rays within your body. If Pearl is removed even for a minute, the conserved energy gets immediately lost. If for some reason it needs to be removed, a new auspicious muhurta needs to be found and Pearl needs to be charged again with mantras and then worn. 

4) Pearl should be avoided to come in contact with harmful chemicals. 

5) Wear only natural or cultured Pearls. Imitation Pearls do not have any benefit. Natural Pearls are the best if you can afford. 

6) A Pearl which has crack or black dots in it, should not worn. It may give negative and depressing thoughts to the wearer. 

7) Pearl should not be exposed to sudden extreme temperature changes for example sudden change in temperature from very hot to very cold or from very cold to very hot. It makes it brittle and reduces its life.  

मैं रत्नों के ऊपर एक सीरीज़ शुरू करने जा रहा हूँ । उसी सीरीज़ में आज मेरी पहली ब्लॉग पोस्ट मोती के ऊपर है । 

मोती: मोती सीप के अंदर बनता है । सीप के अंदर जब भी कोई बाहरी तत्त्व जैसे की कोई धूल का कण या कोई कीड़ा चला जाता है तो इससे सीप को बहुत तकलीफ होती है और यह अपने शरीर से एक तत्त्व छोड़ने लगता है जो उस बाहरी तत्त्व के ऊपर जाकर जमना शुरू हो जाता है । कई महीनों और सालों तक सीप लगातार इस तत्त्व को छोड़ती रहती है और परतों पर परत बनती चली जाती है जो की अंत में जाकर मोती बन जाती है ।
मोती कई रंग और रूपों में आता है । पूर्णतया गोल मोती बहुत दुर्लभ होते हैं और इसीलिए बहुत महंगे भी होते हैं । यह कई रंगों में आते हैं जैसे सफ़ेद, गुलाबी, काला, नीला, क्रीम इत्यादि । 

मोती के कुछ भौतिक गुण

मोह्स स्केल: 2.5 - 4.5
आपेक्षिक भार: 2.60 - 2.85
बायरफ्रिन्जेन्स: 0.156
अपवर्तनांक: 1.52 - 1.66

उत्पत्ति: प्राकृतिक मोती अब बहुत कम उत्पादित किये जाते हैं लेकिन बहरीन और ऑस्ट्रेलिया ऐसे दो देश हैं जहाँ अभी भी प्राकृतिक मोतियों का उत्पादन किया जाता है। 

प्राकृतिक,कल्चर्ड और कृत्रिम मोती: प्राकृतिक मोती सीप में प्राकृतिक रूप से पैदा होते हैं उसमे कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं होता । लेकिन कल्चर्ड मोती में मानवीय हस्तक्षेप होता है और बाहरी तत्त्व जिसके आस पास सीप परत-दर-परत बनाता जाता है वह बाहरी तत्त्व मनुष्य द्वारा डाला जाता है । प्राकृतिक मोती बहुत महंगी दरों पर मिलते हैं जबकि कल्चर्ड मोती प्राकृतिक मोतियों से काफी सस्ते होते हैं । जहाँ तक ज्योतिष का सम्बन्ध है ज्योतिष विचार से कल्चर्ड मोती भी पहने जा सकते हैं और प्रभावशाली होते हैं । एक्स-रे द्वारा बताया जा सकता है की कोई मोती प्राकृतिक है या कल्चर्ड । 
कृत्रिम मोती जैसा की नाम से ही ज़ाहिर है नकली मोती होते हैं जिन्हे सीप के अंदर नहीं बल्कि मनुष्य द्वारा कई पदार्थों द्वारा लैब में बनाया जाता है । इनकी कीमत एकदम  नगण्य होती है लेकिन कई रत्न बेचने वाले कृत्रिम मोतियों को असली मोती बताकर भोले भाले लोगों को लूटते हैं ।

असली मोती की पहचान: जैसा की ऊपर बताया जा चुका है की मोती तीन प्रकार के होते हैं; प्राकृतिक, कल्चर्ड और कृत्रिम, एक्स रे मशीन से पता लगाया जाता है की मोती प्राकृतिक है या कल्चर्ड । माइक्रोस्कोप से देखकर उनकी संरचना का पता लगाया जा सकता है और ये जाना जा सकता है की मोती प्राकृतिक है, कल्चर्ड है या कृत्रिम है । 
एक्स रे के अलावा हर रत्न के कुछ भौतिक गुण होते हैं जैसे मोह्स स्केल पर कठोरता, अपवर्तनांक इत्यादि जैसा की ऊपर भी बताया गया है । किसी भी रत्न के इन गुणों को कई उपकरणों जैसे की रेफ्रेक्टोमीटर, पोलरीस्कोप (फोटो ऊपर दी गयी है) इत्यादि से मापा जा सकता है और पता लगाया जा सकती है की रत्न असली है या नहीं । आजकल कई रत्न बेचने वाले आपको कहेंगे की रत्न असली है मेरी आपको सलाह है की उनका विशवास न करें और किसी अच्छी लैब में या फिर किसी विशेषज्ञ से जाकर रत्न की जांच ज़रूर करवाएं ।  
चिंता का विषय तो यह है की आजकल कई लैब भी पैसों के लालच में आकर नकली सर्टिफिकेट बनाकर दे देती हैं और वही रत्न आपको ऊंचे दामों में बेचे जाते हैं । 

मोती की ट्रीटमेंट: बहुत सारे रत्न जब खदानों से निकाले जाते हैं तो बहुत सुन्दर नहीं होते । कई रत्नों में दरार आ जाती है धब्बे पड़ जाते हैं । इन पर ट्रीटमेंट करके शीशा भर दिया जाता है या फिर ऊपर से रंगीन डाई की परत चढ़ा दी जाती है जिससे रत्न एकदम सुन्दर बन जाता है और उसकी कीमत बढ़ जाती है । ज्योतिषीय हिसाब से ऐसे रत्न अच्छे नहीं माने जाते । मोती के ऊपर भी डाई की परत चढ़ाई जाती है अगर उसपर कोई दाग लगा हो, ताकि उनकी कीमत खरीददार की नज़रों में कम न हो । 
लॉन्ग वेव और शार्ट वेव पराबैंगनी किरणों की सहायता से पता लगाया जा सकता है की मोती के ऊपर कोई डाई का प्रयोग किया गया है या नहीं ।

मोती किसे डालना चाहिए: कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न (फोटो ऊपर दी गयी है) वालों के लिए मोती अच्छा रहता है । 

मोती कैसे अभिमंत्रित करना चाहिए: मैंने इसके बारे में पहले से ही एक पोस्ट लिखी हुई है । पाठक इस लिंक पर क्लिक करके उस पोस्ट को पढ़ सकते हैं । 

मोती को अभिमंत्रित करने का मंत्र

ॐ चम चन्द्राये नमः 
या फिर 
ॐ श्राम श्रीम श्रौम सह चन्द्राये नमः 

मोती पहनने से लाभ: मोती एक ठन्डे ग्रह का रत्न माना जाता है इसलिए मन को शान्ति और दिमाग को शीतलता प्रदान करता है । मोती पहनने से चिंता, तनाव, रक्तचाप इत्यादि में भी लाभ होता है सुंदरता बढ़ती है। लेकिन ध्यान रहे कोई भी रत्न किसी विशेषज्ञ को अपनी कुंडली दिखाकर ही पहनना चाहिए । कुंडली के हिसाब से अनुपयुक्त रत्न डालने से फायदे के बजाये नुक्सान हो सकता है । 

मोती के विरोधी रत्न: हीरा, नीलम, पन्ना, गोमेद और लहसुनिया मोती के साथ नहीं डालने चाहिए । 

मोती के उपरत्न: मून स्टोन (चन्द्रकान्तमणि) । 

पथ्य और अपथ्य:  1) मोती को अगर चन्द्र यन्त्र के साथ पहना जाए तो बहुत फायदा होता है।

2) मोती पूरा फायदा तभी देता है जब इसे विधि अनुसार अभिमंत्रित करके पहना जाए। 

3) मोती डालने के बाद एक मिनट के लिए भी उतारना नहीं चाहिए । मोती सूर्य की किरणों को  आपके शरीर में संचित करता रहता है जिससे शरीर के ऊर्जा चक्र संचालित होते हैं । अगर मोती को उतार दिया जाए तो यह सारी संचित की हुई ऊर्जा समाप्त हो जाती है और रत्न डालने का फायदा नहीं रहता । अगर किसी वजह से इसे उतारना ही पड़े तो फिर से अच्छा मुहूर्त देखकर पूरे विधि विधान से अभिमंत्रित करके ही डालना चाहिए अन्यथा फायदा नहीं होता । 

4) कोशिश करें की नुकसानदायक केमिकल्स मोती के ऊपर न पड़ें । 

5) केवल प्राकृतिक या कल्चर्ड मोती पहने । कृत्रिम मोती का कोई फायदा नहीं होता । प्राकृतिक मोती सबसे अच्छे रहते हैं अगर आप उन्हें खरीदने की क्षमता रखते हैं तो ।

6) ऐसा मोती जिसमे दरार पड़ी हो या काले धब्बे हों ऐसे मोती को नहीं पहनना चाहिए । इसके डालने से नकारात्मक विचार दिमाग में पैदा हो सकते हैं । 

7) मोती को अगर बहुत ठन्डे तापमान से बहुत गर्म तापमान में अचानक ले जाया जाए या फिर बहुत गर्म से बहुत ठन्डे तापमान में और ऐसा बार बार किया जाए तो मोती को नुक्सान हो सकता है अतः जहाँ तक संभव हो सकें ऐसा करने से बचें ।

Gaurav Malhotra

About the Author:

Gaurav Malhotra is a B Tech in Computer Engineering from National Institute of Technology (NIT, Kurukshetra) and a passionate follower of Astrology. He has widely traveled across the world and helped people with his skills. You can contact him on his email You can also read more about him on his page. His Facebook page is this.


  1. Guru ji,
    I read your blog about Rudrakshas.
    Sir, Can I gift 10 mukhi and 16 mukhi rudraksha in a single mala to my wife?


  2. Sir,
    Ring of any gemstone must not removed once you wear it,
    Is this is same with moon yantra.

    1. Yantras are flexible in that sense. You can remove it and wear it again.

  3. So, nice
    Every thing about pearls

  4. Gaurav ji,
    Should I wear Japanese boll shape pearl?

    1. Yes you can. Any shape in pearl can be worn the only thing is that it should be natural and untreated

  5. Guruji
    very informative article.
    1. when is next auspicious time to wear a panna?
    2. Is there any simple way to know genuineness of gemstone?

    1. The fake stones are so complex now a days so there is no easy method to confirm the genuinty of a stone.
      29th June is a good muhurta to wear panna.

  6. sir stones like ruby,pukhraj, red coral.can this be removed for 5-10 minutes or so just to clean the dirt and again wear it immediately?? is there any harm in that?? or we can't remove it same like the pearl??

    1. They should not be removed even for a minute. If you remove it then you will have to look for next auspicious muhurta, energize the stone on that muhurta and wear it again.

  7. Guru ji,
    It heard that pearl property depends upon its colour or white moon shine is more suitable to me?


    1. The price depends on three things color, hue and saturation. But then now a days when there is so much fraud in gemstones one has to be very careful while purchasing gemstones because even the fake gemstones shine like original ones.

  8. Very nice article

  9. Sir, How one should wear a moon yantra?
    Should it be worn just at time of wearing pearl ring?

    1. It is not necessary to wear it at the time of wearing ring but it can be worn if needed at that time.

  10. After this whitish pearl, waiting for the next blog.
    Thanks for such a nice blog

  11. Thanks GauravJi, Awesome Article

  12. Gauravji... Very Thankful for your information. Can you post a blog on yellow sapphire as you have asked me to wear it. Would like to know all the details about yellow saphire.

    1. I will surely post it but you need to wait for some weeks. My nest post is on Red Coral, then Emerald and then Yellow Sapphire. I get very less time to work on blog post in my busy schedule.

  13. Gaurav ji
    Very informative article.
    When is the next best time to wear a Pukraj and a Pearl stone . I was suggested to wear both and also a coral.. Any auspicous time

    1. 29th June is a very good day to energize both and wear them.

  14. I was told that certain stones are to be worn on certain days like Pukhraj is to be worn on thursdays and red coral on certain day. After dipping it with ganga jal and milk .Please guide

    1. Please refer this post

  15. sir i am a girl 24years of age d.o.b 18th feb,1990. I want to know in which hand and in which finger should i wear the pearl ring? I am right handed. Please reply.

  16. Hi, it's difficult for me to continuously wear a gemstone due to the nature of my job. Almost every alternate day I have to remove it while I am doing surgery. What's the best thing I can do, other than using it as a pendant. I am using neelam, need to know that does it need re-energisation at regular intervals or ones energisation ha been done at the time of wearing, it's ok.

    1. Energize at least once a year. You can wear it as a pendant.

  17. 1 sep 1981 and time khandwa mp on 12.00 pm Tuesday can wear pearl in place of panna I confuse in both .....becouse ativishitha karak and marak wahi moon only karak mind alway fluctuate pls ans ..

  18. Hi
    Pearls are best known for good luck and peace.
    Thank you for the informative post .
    Visit : for more details


I get huge no. of comments everyday and it is not possible for me to reply to each and every comment due to scarcity of time. I will try my best to reply at least a few comments everyday.