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Monday, July 1, 2019

Astrological Significance of Partial Lunar Eclipse on 17 July 2019

Total Lunar Eclipse - Top Astrologer
Eclipse

Astrological Significance of Partial Lunar Eclipse on 17 July 2019

Dear readers 

I am going to write about the partial lunar eclipse which is going to happen on 17th July 2019. This lunar eclipse will be visible all over India. The lunar eclipse will be also be visible in much of Asia and Europe, Australia, South-East North America, Africa, and South America. 
It will start from 17th July at 1:31AM and end on 17th July at 4:29AM.

'Parva Kaal' of Lunar Eclipse: 

The duration of eclipse is called the Parva Kaal. Holy bath, charity and Mantra recitation has lot of importance during eclipse. Normally the 'Parva Kaal' lasts from the beginning of eclipse till the end of eclipse. In my opinion, everyone should do their spiritual activities by considering moon rise as the beginning of Parva Kaal. Total duration of parva kaal is 2 hours and 58 minutes.

'Sutak' of Eclipse: 

Sutak of this eclipse will start from 16th July 2019 at 16:31.

Effect of Eclipse:

This particular lunar eclipse is happening on First charan of Uttarashadha and end on second charan of  Uttarashadha nakshatra. That is why the eclipse will not prove to be very favorable for this nakshatra. The eclipse may also not be favorable to nobles, rich people, builders, farmers, doctors, businessmen, ministers and people living in south India.   
 

Do's and Don'ts During and After the Eclipse: 

During the sutak and eclipse holy bath, charity, Mantra recitation, reading of religious scriptures, pilgrimage, meditation, havan etc. should be done. 

One should keep aside things like grains, rice, white clothes and other things that are to be donated before Sutak on 16th July. These should be donated on the next day on 17th July 2019 at the time of sunrise, after taking bath, to an honest and deserving Brahmin or to the poor people. 

These things are prohibited during sutak and eclipse; touching an idle, unnecessary consumption of food, sex, sleeping, oil massage etc.

Telling a lie, gossiping, cutting nails are also prohibited. 

Consuming food or taking medicine during the eclipse are NOT prohibited for old people, patients, kids and pregnant ladies. 

Pregnant ladies should avoid cutting vegetables and baking pappads. They should keep reciting religious scriptures during the eclipse so that the baby in the womb gets good samskaras. 

One should drop Kusha grass or Tulsi before sutak in liquid food items like milk, curd, pickle, chutney etc. so that these do not get contaminated.

One should recite Mahamrityunjaya Mantra during Eclipse for getting rid of diseases. One can also do this remedy for recovery from diseases.



प्रिय पाठकों इस पोस्ट में मैं आप सब को 17 जुलाई को लगने वाले आंशिक चंद्रग्रहण के बारे में बताऊंगा। यह चंद्रग्रहण संपूर्ण भारतवर्ष में दिखाई देगा। यह चंद्र ग्रहण यूरोप और एशिया के ज़्यादातर भाग, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका के दक्षिण पूर्वी भाग और दक्षिण अमेरिका में दिखाई देगा। 
यह 17 जुलाई की सुबह 1:31 AM से शुरू होगा और 17 जुलाई की ही सुबह 4:29 AM पर समाप्त होगा।

ग्रहण का पर्व काल 

चंद्र ग्रहण में स्नान दान जप आदि का विशेष महत्व होता है। सामान्यतः ग्रहण का पर्व काल ग्रहण आरंभ से ग्रहण समाप्ति तक का काल माना जाता है। धर्म परायण लोगों को चंद्र उदय को ही ग्रहण आरंभ मानकर सभी धार्मिक क्रियाओं का संपादन व अनुष्ठान करना चाहिए। पर्व काल 2 घंटे और 58 मिनट का होगा। 

ग्रहण का सूतक 

इस ग्रहण का सूतक 16 जुलाई 2019 को शाम 4 बजकर 31 मिनट से शुरू होगा।

ग्रहण फल

यह चंद्रग्रहण उत्तराषाढ़ा के पहले चरण को स्पर्श करेगा और दुसरे चरण में समाप्त होगा। इसलिए इस नक्षत्र वालों के लिए ग्रहण का प्रभाव अच्छा नहीं है। यह ग्रहण धनी लोगों के लिए, बिल्डर, किसान, डॉक्टर, व्यापारी, मंत्री एवं दक्षिण भारत वालों के लिए अच्छा नहीं है।

ग्रहण काल तथा बाद में क्या करें क्या ना करें 

ग्रहण के सूतक और ग्रहण काल में स्नान, दान, जप, पाठ, मंत्र, स्तोत्र पाठ, मंत्र सिद्धि, तीर्थ स्थान, ध्यान, हवन आदि शुभ कार्यों का संपादन करना अच्छा रहता है।

आस्थावान लोगों को 16 जुलाई को सूतक से पूर्व ही अपनी राशि अनुसार अन्न-जल, चावल, सफेद वस्त्र एवं अन्य दान योग्य वस्तुओं का संग्रह करके संकल्प कर लेना चाहिए। तथा अगले दिन यानी 17 जुलाई को प्रातः सूर्योदय के समय पुनः स्नान करके संकल्प पूर्वक ब्राह्मण को या फिर गरीब आदमियों को दान करना चाहिए।

सूतक एवं ग्रहण काल में मूर्ति स्पर्श, अनावश्यक खाना पीना, मैथुन, निद्रा, तेल-मालिश वर्जित है।

झूठ कपट आदि व्यर्थ बातें करना, नाखून काटना आदि से परहेज करना चाहिए।

वृद्ध, रोगी, बालक एवं गर्भवती स्त्रियों को भोजन या दवाई लेने में कोई दोष नहीं है।

गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में सब्जी काटना, पापड़ सेकना आदि उत्तेजित कार्यों से परहेज करना चाहिए तथा धार्मिक ग्रंथ का पाठ करते हुए प्रसन्नचित्त रहे। इससे होने वाली संतान स्वस्थ एवं सद्गुणी होती है।

ग्रहण के सूतक से पहले जलीय वस्तुओं जैसे दूध, दही, अचार, चटनी, मुरब्बा इत्यादि में कुशा घास या फिर तुलसी डाल देनी चाहिए। इससे यह दूषित नहीं होते। 

रोग शांति के लिए ग्रहण काल में महामृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए। स्वास्थय लाभ के लिए इस लिंक पर दिया हुआ उपाय भी किया जा सकता है। 


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Gaurav Malhotra

About the Author:

Gaurav Malhotra is a B Tech in Computer Engineering from National Institute of Technology (NIT, Kurukshetra) and a passionate follower of Astrology. He has widely traveled across the world and helped people with his skills. You can contact him on his email jyotishremedy@gmail.com. You can also read more about him on his page. His Facebook page can be reached here.


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