Monday, June 12, 2017

Hanuman Chalisa in Hindi and English



Dear Readers

I am giving Hanuman Chalisa in this post in both Hindi and English. This was composed by Goswami Tulsidas Ji. One who recites Hanuman Chalisa daily with complete devotion in Lord Hanuman becomes free from all fears and troubles. I won't give any procedure here because for me the faith and devotion is the most important part. While reciting Hanuman Chalisa one should be completely involved in it. 


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Doha 

Shri Guru Charan Sarooja-raj Nija manu Mukura Sudhaari
Baranau Rahubhara Bimala Jasu Jo Dayaku Phala Chari
Budhee-Heen Tanu Jaanikay Sumirau Pavana Kumaar
Bala-Budhee Bidya Dehoo Moheen Harahu Kalais Bikaar


"Having cleaned the mirror of my mind with the dust from the lotus feet of my Guru, I sing the pure glories of Lord Ramachandra, who bestows the four fruits of life: religion, wealth, pleasure and liberation."
"As I know I am an ignorant fool, I meditate on the Son of Wind, Hanuman, and pray him to give me strength, wisdom and knowledge, purifying me from all defects and bad things."


श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार 


इन पंक्तियों में राम भक्त हनुमान कहते हैं कि चरण कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ कर, श्रीराम के दोषरहित यश का वर्णन करता हूं जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूपी चार फल देने वाला है. इस पाठ का स्मरण करते हुए स्वयं को बुद्धिहीन जानते हुए, मैं पवनपुत्र श्रीहनुमान का स्मरण करता हूं जो मुझे बल, बुद्धि और विद्या प्रदान करेंगे और मेरे मन के दुखों का नाश करेंगे |


Chopai


Jai Hanuman Gyaan Gun Sagar। Jai Kapis Teehun Lok Ujagar ||1||
Ram Doot Atulit Bal Dhama। Anjani-Putra Pavansut Nama ||2||

"Glory to Hanuman, ocean of knowledge and good qualities. Glory to the lord of the Vanaras. His fame echoes through the three worlds. Glory to the divine messenger and servant of Sri Rama! He is known as Pavana Suta, son of the Wind and Mother Anjana, and his prowess is invincible."


जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥1॥
राम दूत अतुलित बल धामा, अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥2॥


इसका अर्थ है कि हनुमान स्वंय ज्ञान का एक विशाल सागर हैं जिनके पराक्रम का पूरे विश्व में गुणगान होता है. वे भगवान राम के दूत, अपरिमित शक्ति के धाम, अंजनि के पुत्र और पवनपुत्र नाम से जाने जाते हैं |


Mahabir Bikram Bajrangi। Kumati Nivaar Sumati Ke Sangi ||3||
Kanchan Baran Biraaj Subesa। Kaanan Kundal Kunchit Kesa ||4||



"O Hanuman, you have unlimited courage and strength, you destroy ignorance and grant wisdom. Your complexion is golden, your hair is curly and you wear ear-rings."



महाबीर बिक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी॥3॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुंडल कुँचित केसा॥4॥

हनुमान महान वीर और बलवान हैं, उनका अंग वज्र के समान है, वे खराब बुद्धि दूर करके शुभ बुद्धि देने वाले हैं, आप स्वर्ण के समान रंग वाले, स्वच्छ और सुन्दर वेश वाले हैं व आपके कान में कुंडल शोभायमान हैं |



Haath Bajra Aau Dhwaja Biraaje। Kaandhe Moonj Janeu Saaje ||5||
Sankar Suvan Kesarinandan। Tej Prataap Maha Jag Bandan ||6||



"In one hand you hold the divine Vajra weapon, in the other you have the flag with your emblem. Your shoulder is decorated with the holy thread. You are the [11th Rudra] avatara of Lord Shiva and son of Sri Keshari. Your great prowess is famous all over the world."

Bidyabaan Guni Ati Chaatur। Ram Kaaj Karibe Ko Aatur ||7||Pra
bhu Charitra Sunibe Ko Rasiya। Ram Lakhan Sita Man Basiya ||8||


"You have the greatest wealth of divine knowledge. You are virtuous and intelligent, always ready to serve Lord Rama, and your greatest pleasure is listening to His glories. Rama, Laksmana and Sita always reside in your heart."


Sukshma Roop Dhari Siyahin Dikhawa। Bikat Roop Dhari Lanka Jarawa ||9||
Bheem Roop Dhari Asur Sanhaare। Ramchandra Ke Kaaj Sanwaare ||10||


"You appeared before Sita in a very small form, but you burned Lanka with a terrifying form and killed the demons with a gigantic form. In this way you always serve Lord Rama."


हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे,काँधे मूँज जनेऊ साजे॥5॥
शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जगवंदन॥6॥
विद्यावान गुनी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर॥7॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मनबसिया॥8॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा, विकट रूप धरि लंक जरावा॥9॥
भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचंद्र के काज सवाँरे॥10॥


5,6,7,8,9,10 अर्थात हनुमान के कंधे पर अपनी गदा है और वे हरदम श्रीराम की अराधना व उनकी आज्ञा का पालन करते हैं. हनुमान सूक्ष्म रूप में श्रीसीताजी के दर्शन करते हैं, भयंकर रूप लेकर लंका का दहन करते हैं, विशाल रूप लेकर राक्षसों का नाश करते हैं. आप विद्वान, गुणी और अत्यंत बुद्धिमान हैं व श्रीराम के कार्य करने के लिए सदैव उत्सुक रहते हैं. हनुमान के महान तेज और प्रताप की सारा जगत वंदना करता है |

Laaye Sajivan Lakhan Jiyaaye। Shri Raghubeer Harashi Ur Laaye ||11||
Raghupati Keenhi Bahut Badai। Tum Mum Priy Bharat Hi Sam Bhai ||12||


"You brought the medicinal herb to revive Lakshmana, and overcome with joy Rama embraced you and glorified you, saying that He loves you as much as He loves His own brother Bharata."


लाय सजीवन लखन जियाए, श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥11॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरत–हि सम भाई॥12॥


भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण की जान बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाकर हनुमान जी ने अपने आराध्य श्रीराम का मन मोह लिया. श्रीराम इतने खुश हुए कि उन्होंने अपने भाई भरत की तरह अपना प्रिय भाई माना |


Sahas Badan Tumhro Jas Gaavein। As Kahi Shripati Kanth Lagavein ||13||
Sankadik Bramhadi Munisa। Narad Sarad Sahit Ahisa ||14||


"Sesanaga with his thousands mouths is singing your glories: with these words, Rama embraced you. Even the Kumaras, Narada, Sarasvati cannot completely describe your glories."


सहस बदन तुम्हरो जस गावै, अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥13॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद सारद सहित अहीसा॥14॥


इससे हमें सीख लेनी चाहिए. किसी काम को करने में देर नहीं करनी चाहिए, अच्छे फल अवश्य मिलेंगे | हनुमान जी का ऐसा व्यक्तित्व है जिसका कोई भी सनक आदि ऋषि, ब्रह्मा आदि देव और मुनि, नारद, यम, कुबेर आदि वर्णन नहीं कर सकते हैं |


Jam Kuber Digpaal Jahan Te। Kabi Kobid Kahi Sake Kahaan Te ||15||
Tum Upkaar Sugreevhin Kinha। Ram Milaaye Raajpad Dinha ||16||



"Even Yama, Kuvera, the lords of the directions, poets and sages are incapable of fully describing your glories. You introduced Rama to Sugriva, causing him to become the king of the Vanaras."

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते,कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥15॥ 
तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा, राम मिलाय राज पद दीन्हा॥16॥


कवि और विद्वान भी कैसे उसका वर्णन कर सकते हैं |हनुमान ने ही श्रीराम और सुग्रीव को मिलाने का काम किया जिसके चलते सुग्रीव अपनी मान–प्रतिष्ठा वापस हासिल कर पाए |


Tumhro Mantra Vibhishan Maana। Lankeswar Bhaye Sab Jag Jana ||17||
Jug Sahastra Jojan Par Bhaanu। Lilyo Taahi Madhur Phal Jaanu ||18||




"By following your advice, Vibhisana became the king of Lanka: everyone knows this. You grabbed the sun, millions of kilometers away in the sky, taking it for a ripe fruit."


तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा, राम मिलाय राज पद दीन्हा॥17॥
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू, लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥18॥


हनुमान की सलाह से ही विभीषण को लंका का सिंघासन हासिल हुआ | इन पंक्तियों से हनुमान के बचपन का ज्ञात होता है जब उन्हें भीषण भूख सता रही थी और वे सूर्य को मीठा फल समझकर उसे खाने के लिए आकाश में उड़ गए |


Prabhu Mudrika Meli Mukh Maahi। Jaldhi Laanghi Gaye Achraj Naahi ||19|| 
Durgam Kaaj Jagat Ke Jete। Sugam Anugraha Tumhre Tete ||20||


"You crossed the ocean keeping Rama's ring in your mouth as a token for Sita. You could perform such a miraculous task because with your grace even impossible tasks become possible and even easy."

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही, जलधि लाँघि गए अचरज नाही॥19॥
दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥20॥


आपने वयस्कावस्था में श्रीराम की अंगूठी को मुंह में दबाकर लंका तक पहुंचने के लिए समुद्र पार किया | जब आपकी जिम्मेदारी में कोई काम होता है, तो जीवन सरल हो जाता है |

Ram Dooare Tum Rakhwaare। Hoat Na Aagya Binu Paisare ||21||
Sab Sukh Lahai Tumhari Sarna। Tum Rakhshak Kaahu Ko Darna ||22||

"You always guard the door of Sri Rama, and without your permission no one can enter. By taking shelter in you, all the joys of life are obtained, and one under your protection has nothing to fear."

राम दुआरे तुम रखवारे, होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥21॥
सब सुख लहैं तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहु को डरना॥22॥


आप ही तो स्वर्ग यानी श्रीराम तक पहुंचने के द्वार की सुरक्षा करते हैं और आपके आदेश के बिना कोई भी वहां प्रवेश नहीं कर सकता | हनुमान के होते हुए हमें किसी प्रकार का भय सता नहीं सकता |


Aapan Tej Samharo Aapai। Teeno Lok Haank Te Kaanpen ||23||
Bhoot Pisaach Nikat Nahi Aave। Mahabir Jab Naam Sunave ||24||


"Your radiance is supreme, and the three worlds tremble when you move. You are the supreme brahmachari, conserving your energy. By repeating the name of Hanuman, all the ghosts and demons are chased away."

आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हाँक तै कापै॥23॥
भूत पिशाच निकट नहि आवै, महावीर जब नाम सुनावै॥24॥


हनुमान के तेज से सारा विश्व कांपता है. आपके नाम का सिमरन करने से भक्त को शक्तिशाली कवच प्राप्त होता है और यही कवच हमें भूत–पिशाच और बीमारियों बचाता है |

Naasai Rog Harai Sab Peera। Japat Nirantar Hanumat Beera ||25||
Sankat Te Hanuman Chhoodave। Man Krama Bachan Dhyaan Jo Laave ||26||


"All diseases and sufferings are destroyed by the constant repetition of the name of Hanuman. One who meditates on him with his mind, heart and activities is saved from all difficulties."


नासै रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा॥25॥
संकट तै हनुमान छुडावै, मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥26॥


 उनका लगातार स्मरण करने से सभी रोग नष्ट हो जाते हैं, सब पीड़ाएँ हर ली जाती हैं | हे हनुमान जी! विचार करने में, कर्म करने में और बोलने में, जिनका ध्यान आपमें रहता है, उनको सब संकटों से आप छुड़ाते है।



Sab Par Raam Tapasvi Raja। Tin Ke Kaaj Sakal Tum Saaja ||27||
Aur Manorath Jo Koi Laave। Soi Amit Jivan Phal Paave ||28||


"Rama is the Lord of yoga, and all your actions are dedicated to Him. By your grace, all desires are granted."


सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा॥27॥
और मनोरथ जो कोई लावै,सोई अमित जीवन फल पावै॥28॥


तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यों को आपने सहज में कर दिया। जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करे तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन में कोई सीमा नहीं होती।


Chaaro Jug Partaap Tumhara। Hai Parsiddh Jagat Ujiyara ||29||
Saadhu Sant Ke Tum Rakhwaare। Asur Nikandan Ram Dulaare ||30||


"In all times, you are famous for your prowess and talents, your glories are spread all over the universe. You protect the devotees and the sages, you destroy the demons, and you are Rama's beloved."


चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥29॥
साधु संत के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे॥30॥


चारों युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग में आपका यश फैला हुआ है, जगत में आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।हे श्री राम के दुलारे ! आप सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है।


Asht Siddhi Nau Nidhi Ke Daata। As bar Deen Janki Maata ||31||
Ram Rasayan Tumhre Paasa। Sada Raho Raghupati Ke Daasa ||32||


"Mother Sita blessed you with the power to grant the eight spiritual perfections and the nine material prosperities, and Sri Rama gave you the power to heal. You are always His humble servant."


अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता॥31॥ 
राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा॥32॥


आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है।आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण में रहते है, जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम औषधि है।


Tumhre Bhajan Ram Ko Paave। Janam Janam Ke Dukh Bisraave ||33||
Antakaal Raghubar Pur Jaayee। Jahan Janam Hari-Bhakt Kahayee ||34||


"By meditating on you, one reaches Lord Rama, and eliminates the sufferings of many lifetimes. After death, your devotee will reach the abode of Rama, where he will always be a devotee of the Lord."


तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावै॥33॥

अंतकाल रघुवरपुर जाई, जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥34॥


आपका भजन करने से श्री राम जी प्राप्त होते है, और जन्म जन्मांतर के दुःख दूर होते है।अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलायेंगे।


Aur Devta Chitt Na Dharayi। Hanumat Sei Sarb Sukh Karayi ||35||
Sankat Kate Mite Sab Peera। Jo Sumirai Hanumat Balbira ||36||


"The other Devas do not care for the sufferings of the human beings: only Hanuman is the source of all joys, and by remembering him all sufferings disappear."

और देवता चित्त ना धरई,हनुमत सेई सर्व सुख करई॥35॥
संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥36॥


हे हनुमान जी!आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है, फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नहीं रहती। हे वीर हनुमान जी! जो आपका सुमिरन करता रहता है, उसके सब संकट कट जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है।

Jai Jai Jai Hanuman Gosaai। Kripa Karahun Gurudev Ki Naai ||37||
Jo Sat Baar Paath Kar Koi। Chhootahin Bandi Maha sukh Hoyi ||38||


"Victory and glory to lord Hanuman! O divine Guru, bless us with your grace. By repeating this mantra one hundred times, one is liberated by all problems and obtains unlimited happiness."

जै जै जै हनुमान गुसाईँ, कृपा करहु गुरु देव की नाई॥37॥
जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहि बंदि महा सुख होई॥38॥


हे स्वामी हनुमान जी!आपकी जय हो, जय हो, जय हो!आप मुझपर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए। जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बन्धनों से छुट जायेगा और उसे परमानन्द मिलेगा।

Jo Yeh Padhe Hanuman Chalisa। Hoye Siddhi Saakhi Gaurisa ||39||
Tulsidas Sada Harichera। Kije Naath Hridaya Mahn Dera ||40||

"One who repeats this song with the glories of lord Hanuman obtains all the spiritual perfections. Tulasidasa, the eternal servant of the Lord, gives this promise in the name of Mahadeva, the lord of Gauri. O lord, may you always reside in my heart."



जो यह पढ़े हनुमान चालीसा, होय सिद्ध साखी गौरीसा॥39॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥40॥

भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया, इसलिए वे साक्षी है, कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी। महान कवि तुलसीदास ने अपनी इस कविता का समापन करते हुए बताया है कि वे क्या हैं ? वे स्वयं को भगवान का भक्त कहते हैं, सेवक मानते हैं और प्रार्थना करते हैं कि प्रभु उनके हृदय में वास करें।

Pavantanaye Sankat Haran, Mangal Moorti Roop।
Ram Lakhan Sita Sahit Hridaya Basahu Soor Bhoop ||

"O Son of the Wind, you destroy all difficulties. Your form is all auspicious, and you always reside in my heart together with Rama, Laksmana and Sita."



पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥


आप पवनपुत्र हैं, संकटमोचन हैं, मंगलमूर्ति हैं व आप देवताओं के ईश्वर श्रीराम, श्रीसीता जी और श्रीलक्ष्मण के साथ मेरे हृदय में निवास कीजिए। 


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Gaurav Malhotra

About the Author:

Gaurav Malhotra is a B Tech in Computer Engineering from National Institute of Technology (NIT, Kurukshetra) and a passionate follower of Astrology. He has widely traveled across the world and helped people with his skills. You can contact him on his email jyotishremedy@gmail.com. You can also read more about him on his page.

2 comments:

I get huge no. of comments everyday and it is not possible for me to reply to each and every comment due to scarcity of time. I will try my best to reply at least a few comments everyday.

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