Sunday, March 1, 2015

Garbh Gauri Rudraksha

gauri ganesh rudraksha

Garbh Gauri Rudraksha is also called Gauri Ganesh Rudraksha. Garbh Gauri rudraksha is two rudrakshas naturally joined with each other with one rudraksha smaller than the other. The bigger rudraksha represents Goddess parvati and smaller rudraksha represents Lord Ganesha, her son. (Android users who are watching this post through my app (Astro Junction App) on their smartphones, should click on the title of the post above to see the complete post.)

Benefits: This rudraksha saves the pregnancy from unexpected dangers. It also helps in the conception. It is also used to maintain good relations between mother and her child.     

Who Should Use it: Ladies who are prone to miscarriages. Mothers who do not have cordial relations with their children. Ladies who are not able to conceive. Those who are concerned about the safe and normal delivery of child.     

How to Use it: On any Monday or monthly shivratri,

  • Rinse the Bead(s) of Rudraksha in water of Ganga
  • Apply the sandal wood paste/tilak on it. 
  • Lit insane and the lamp of Ghee.
  • Offer some white flowers to the Rudraksha.
  • Chant Panchakshari Mantra (given below) for 11 times.
  • Touch the bead with shivling

and wear the rudraksha. 

Please keep in mind the precautions given for Rudraksha in my earlier post. Though you can wear it in on any Monday, the best time in the year to wear the Rudraksha is Mahashivratri.

Panchakshari Mantra:

नमः शिवाये
Om Namaha

Click on this link to download and listen to above mantra. 
ऊपर दिए हुए मंत्र को डाउनलोड करके सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें । 

इस पोस्ट में मैं गर्भ गौरी रुद्राक्ष के बारे में लिखने जा रहा हूँ जिसे गौरी गणेश रुद्राक्ष भी कहा जाता है । गर्भ गौरी रुद्राक्ष में दो रुद्राक्ष एक दूसरे से प्राकृतिक रूप से जुड़े हुए होते हैं ।  इनमे से एक रुद्राक्ष बड़ा होता है और दूसरा रुद्राक्ष छोटा होता है । बड़ा रुद्राक्ष माँ पार्वती का रूप माना जाता है और छोटा रुद्राक्ष गणेश जी का रूप माना जाता है । 

पहनने का फायदा: इस रुद्राक्ष को पहनने से अवांछित गर्भपात का खतरा नहीं रहता । ऐसी महिलायें जो गर्भवती नहीं हो पा रही हैं उन्हें भी इससे फायदा होता है । यह रुद्राक्ष माँ और बच्चों के बीच में मधुर सम्बन्ध बनाने में सहायता करता है ।  

कौन पहने: ऐसी महिलायें जिन्हे गर्भपात खतरा रहता है । ऐसी महिलायें जिनका अपने बच्चों से सम्बन्ध मधुर नहीं है । ऐसी महिलायें जो गर्भवती नहीं हो पा रहीं हैं । ऐसे लोग जो सुखमय और सुरक्षित प्रसव की कामना रखते हैं ।   

पहनने की विधि: किसी भी सोमवार को या फिर मासिक शिवरात्रि को 

  •     रुद्राक्ष को गंगाजल में धो ले
  •     इसके ऊपर चन्दन का तिलक लगाएं
  •     धुप और अगरबत्ती दिखाएँ
  •     सफ़ेद रंग के फूल रुद्राक्ष को ऊपर चढ़ाएं
  •     रुद्राक्ष को दायें हाथ में लेकर ऊपर दिए हुए पंचाक्षरी मंत्र को 11 बार बोलें 
  •     रुद्राक्ष को शिवलिंग से छुआएं

और रुद्राक्ष को पहन लें । 

कृपया रुद्राक्ष के ऊपर मेरी यह वाली पोस्ट भी पढ़ लें जिसमे मैंने कुछ हिदायतें लिखी हुई हैं रुद्राक्ष के बारे में । रुद्राक्ष वैसे को किसी भी सोमवार को डाला जा सकता है लेकिन सबसे अच्छा दिन होता है महाशिवरात्री का ।

Gaurav Malhotra

About the Author:

Gaurav Malhotra is a B Tech in Comp. Engg. from National Institute of Technology (NIT, Kurukshetra) and a passionate follower of Astrology. He has widely traveled across the world and helped people with his skills. You can contact him at +91-9211921182 or on his email You can also read more about him on his page. This is his Facebook page.

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